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प्रशंसा: जानिए, बिहार में शराबबंदी को सबसे ज्यादा किसने सराहा

बिहार में शराबबंदी की सफलता को जानने और इसका अध्ययन करने छत्तीसगढ़ से आये दल ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। दल ने बताया कि यहां हर जगह की महिलाओं ने शराबबंदी की काफी प्रशंसा की है। शराबबंदी से हो रहे फायदों के बारे में बताया है। अध्ययन दल के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार की शाम को एक अणे मार्ग में मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह को यह जानकारी दी।

 

अध्ययन दल के प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि उनके राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी शराबबंदी के पक्ष में हैं और इसके लिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दल को एक अणे मार्ग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलना था, लेकिन मुख्यमंत्री अस्वस्थता के कारण दल से नहीं मिल सके। उनकी जगह उनके परामर्शी मिले। अंजनी कुमार सिंह से एक अणे मार्ग स्थित संकल्प सभागार में 11 सदस्यीय दल को विस्तार से शराबबंदी को राज्य में लागू करने के दौरान किए गए प्रयासों और इसके फायदों के बारे में बताया। इससे पहले अध्ययन दल के समक्ष पुराना सचिवालय के सभागार में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों ने शराबबंदी को लेकर किये गये अपने-अपने कार्यों को रखा।

 

अंजनी कुमार सिंह ने दल को बताया कि बिहार में शराबबंदी लागू करना कठिन काम था। यहां के कुछ पढ़े लिखे व डिफरेंट लॉबी के लोग इसके विरोध में थे। लेकिन मुख्यमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण पांच अप्रैल 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई। शराबबंदी लागू करने के पहले शिक्षा विभाग द्वारा गाना, नाटक एवं कला जत्था के माध्यम से गांव-गांव तक अभियान चलाया गया। शपथ पत्र भरवाया गया, दीवारों पर स्लोगन लिखवाए गए। इन सबसे समाज में शराबबंदी के खिलाफ वातावरण बना।

 

अध्ययन दल में ये हैं शामिल : 
छत्तीसगढ़ से आए दल में बस्तर के सांसद दिनेश कश्यप, जंजगीर चंपा की सांसद कमला देवी, कवरघा के विधायक अशोक साहू, कुनकुरी के विधायक रोहित कुमार साईं, छत्तीसगढ़ के उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव डीडी सिंह आदि शामिल थे। .

 

 

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